Headlinesकोविड 19ट्रेंडिंग

Patanjali : बाबा ने ढूंढ निकाली कोरोना की दवा, जानिए कैसे करती है काम और क्या है कीमत

Patanjali : उधार के 13 हजार रुपयों से रखी थी रामदेव ने पतंजलि की नींव, अब दे रही हैं बड़ी कंपनियों को टक्कर

Patanjali :  नई दिल्ली. योगगुरू बाबा रामदेव इस समय कई बड़ी बिमारियों की दवाई ढूंढ रहे हैं. इसी कड़ी में रामदेव (Baba Ramdev) की संस्थान पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurved) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) की आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल (Coronil) आज लॉन्च कर दी है. बता दें कि इससे पहले ग्लेनमार्क फार्मा (Glenmark Pharma) और सिप्ला (Cipla) भारत में कोविड-19 के इलाज के लिए दवा लॉन्च कर चुके हैं. अब देखना होगा की पतंजलि की ये दावा कितनी असरदार होगी, और बाकि कंपनियों को कितनी बड़ी टक्कर देगी. रामदेव का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वो दिग्गजों को धूल चटाने का माद्दा रखते हैं. आइए आपको बताते हैं बाबा रामदेव के योगगुरु से लेकर ऐक्टिविस्‍ट और FMCG बिजनेस के बाहुबली बनने तक के सफर के बारे में..

कभी 13 हजार रुपए में शुरू की थी कंपनी
हिंदी पत्रिका आउटलुक में छपी स्टोरी के मुताबिक सन 1995 में पतंजलि का कंपनी के रुप में रजिस्ट्रेशन हुआ था. बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने महज 13 हजार रुपए में पतंजलि का रजिस्ट्रेशन कराया था. उस वक्‍त इन दोनों के पास सिर्फ 3500 रुपए थे. किसी तरह दोस्‍तों से उधारी लेकर रेजिस्ट्रेशन शुल्‍क चुकाया गया.

ये भी पढ़ें – India-China Tensions: लद्दाख टकराव के बाद LAC पर माहौल तनावपूर्ण, अभी भी बड़ी संख्या में जवान तैनात

पतंजली ऐसे बन गई FMCG की बाहुबली

कंपनी मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2011-12 में कंपनी की आय 453 करोड़ रुपए और मुनाफा 56 करोड़ रुपए था. फाइनेंशियल ईयर 2012-13 में कंपनी की आय बढ़कर 849 करोड़ रुपए और मुनाफा बढ़कर 91 करोड़ रुपए हो गया. अगर फीसदी के लिहाज से देखें तो 6 साल में कंपनी का कारोबार में 2231 फीसदी की ग्रोथ आई है. कंपनी का कुल कारोबार 453 करोड़ रुपए से बढ़कर अब 10561 करोड़ रुपए हो गया है.

कुछ ऐसे शुरू किया सफर

बाबा रामदेव ने एक टीवी को दिए इंटरव्यु में कहा था कि उन दिनों हरियाणा और राजस्थान के शहरों में हर साल करीब पचास योग कैंप लगाता था उन दिनों बाबा रामदेव को अक्सर हरिद्वार की सड़कों पर स्कूटर चलाते देखा जाता था. साल 2002 में गुरु शंकरदेव की खराब सेहत के चलते बाबा रामदेव दिव्य योग ट्रस्ट का चेहरा बने जबकि उनके दोस्त बालकृष्ण ने ट्र्स्ट के फाइनेंस का जिम्मा संभाला और कर्मवीर को ट्रस्ट का प्रशासक बनाया गया था. इसके बाद से ही गुरुकुल के जमाने के ये तीनों दोस्त पतंजलि योगपीठ के आर्थिक साम्राज्य को आगे बढ़ा रहे है.

ये भी पढ़ें –अलग अंदाज में योगा पोज देते नजर आईं अलाया एफ, बोलीं- मुश्किल से बीते 3 मिनट

योग शिविर से हुए लोकप्रिय

हरिद्वार में दिव्य योग ट्रस्ट के बैनर तले बाबा रामदेव ने देश और विदेश में जोर-शोर से योग शिविर लगाने शुरु कर दिए थे. हरियाणा के गांवों से शुरु हुआ उनके योग सिखाने का ये सिलसिला गुजरात और दिल्ली से होते हुए मुंबई तक जा पुहंचा था. शुरुआत में बाबा रामदेव के योग शिविर में दो से ढाई सौ लोग आते थे लेकिन जैसे- जैसे उनकी लोकप्रियता बढ रही थी उनके शिविरों में लोगों की संख्या भी तेजी से बढती चली जा रही थी.

दान में मिले 50 हजार रुपए से शुरू किया जड़ी बूटी कारोबार

बाबा रामदेव के ट्रस्ट का मकसद आम लोगों के बीच योग और आयुर्वेद के प्रयोग को लोकप्रिय बनाना था. खुद बाबा रामदेव भी बताते हैं कि पहली बार उनको जो पचास हजार रुपये का दान मिला था उसी से उन्होंने आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का कारोबार शुरु किया था जो आज हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. साल 1995 मे दिव्य योग ट्रस्ट, साल 2006 में दूसरा पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट बना और तीसरा भारत स्वाभीमान ट्र्स्ट बाबा रामदेव एक के बाद एक अपने ट्रस्ट बनाते चले गए और इसी के साथ तेजी से इस संन्यासी का आर्थिक साम्राज्य भी फैलता चला गया है.

टॉप 10 प्रभावी ब्रैंड्स में चौथा स्थान बड़ी बात

पतंजलि के लिए अपार संभावनाएं हैं क्योंकि पांच साल पहले तक सिर्फ आयुर्वेदिक दवाइयां बेचने वाली कंपनी सबसे बड़ा देसी ब्रैंड बन चुकी है जो अपने आप में असाधारण है. ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस के हालिया सर्वे में पतंजलि को भारत के टॉप 10 प्रभावी ब्रैंड्स में चौथा स्थान हासिल हुआ है. पतंजलि के ऊपर गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियां ही हैं. कितनी बड़ी बात है कि पतंजलि ने रैकिंग में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई, सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी एयरटेल और अब तहलका मचा रहे रिलायंस जियो के साथ-साथ ई-रिटेलर फ्लिपकार्ट को भी पटखनी दे दी.

 

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close