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मजदूर दिवस: 5 हजार उद्योगों ने पकड़ी रफ्तार, बाकी हो रहे तैयार

मजदूर दिवस: 5 हजार उद्योगों ने पकड़ी रफ्तार, बाकी हो रहे तैयार

मजदूर दिवस: गोरखपुर मंडल की करीब पांच हजार छोटी-बड़ी इकाइयों में काम शुरू हो गया है। अन्य इकाइयों को भी चलाने की तैयारी शुरू हो गई है। मंडल में कुल करीब 23 हजार छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। लॉकडाउन में सभी बंद हो गई थीं। 20 अप्रैल से सोशल डिस्टेंसिंग व अन्य शर्तों के साथ इन्हें चलाने की छूट मिली तो धीरे-धीरे कामकाज पटरी पर आने लगा है।

कमिश्नर जयंत नार्लीकर ने बताया कि इकाइयों को शुरू करना इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। सभी जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए काम शुरू कराना है ताकि सभी श्रमिक सुरक्षित रहें। उन्होंने बताया कि गोरखपुर मण्डल में करीब पांच हजार छोटी-बड़ी और सरकारी परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। अगले 10 दिनों में बाकी बची इकाइयों को शुरू कराने का लक्ष्य है।

इकाइयों के शुरू होने से जहां विभिन्न तरह के उत्पादन दोबारा से शुरू हो सकेंगे वहीं बेराजगार हो चुके श्रमिकों को रोजगार मिल सकेगा। जहां भी उत्पादन इकाइयां शुरू हुई हैं वहां कड़ाई से प्रोटोकॉल का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल श्रमिकों को उनके कार्य क्षेत्र में ही रहने का निर्देश दिया गया है। आगे केन्द्र और राज्य सरकार से जो निर्देश आएगा उसी के हिसाब से निर्णय लिया जाएगा।

घर गए मजदूरों को वापस लाने में जुटा गीडा प्रशासन 
लॉकडाउन तीन मई को खत्म होने को है। आगे कुछ सहूलियत की उम्मीद उद्यमी कर रहे हैं। सहूलियत मिली तो फैक्ट्रियां रफ्तार पकड़ेंगी। ऐसे में प्रशासन उद्यमियों की मांग पर मजदूरों को घरों से वापस लाने की तैयारी में जुटा हुआ है। अन्य जिलों में रहने वाले ऐसे कर्मचारियों को लाने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उपायुक्त उद्योग को दी गई है।गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की 83 फैक्ट्रियों को संचालित करने की अनुमति दी जा चुकी है। इसके साथ ही गोरखनाथ इंडस्ट्रियल इस्टेट की दर्जन भर फैक्ट्रियों को संचालित करने की अनुमति दी गई है। इन फैक्ट्री मालिकों की प्रमुख समस्या मजदूरों का टोटा है।

इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर आदि जिलों में रहते हैं। लॉकडाउन के चलते ये कर्मचारी काम पर लौट नहीं पा रहे हैं। गीडा के पीआरओ और प्रबंधक सिविल संजय तिवारी ने बताया कि गीडा की 83 फैक्ट्रियों के संचालन की अनुमति दी जा चुकी है। वहीं गुरुवार को पांच वाहन के व आठ व्यक्तिगत पास भी जारी हुए। गीडा और इंडस्ट्रीयल इस्टेट की फैक्ट्रियों में काम करने वाले जो कर्मचारी दूसरे जिले में रहते हैं, उन्हें फैक्ट्री तक लाने का इंतजाम किया जा रहा है। फैक्ट्री मालिकों के वाहनों के लिए पास जारी किये जा रहे हैं। इन्हीं गाड़ियों से मजदूरों को लाया जा सकेगा।
आरके शर्मा, उपायुक्त उद्योग

गीडा में भी में काम शुरू 
पूर्वांचल का औद्योगिक हब कहे जाने वाले गीडा में भी कई उत्पादन इकाइयां शुरू हो गई हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो इसके लिए 50 फीसदी श्रमिक ही काम पर लगाए गए हैं। काम शुरू हो जाने से बीते 35 दिन से बेरोजगार बैठे श्रमिकों को दोबारा रोजगार तो मिला ही साथ ही उनका मनोबल भी बढ़ा है।

चारों जिलों में लगभग पांच हजार उत्पादन इकाइयों में काम शुरू हो चुका है। इसमें सरकारी परियोजनाएं भी शामिल हैं। अभी कई इकाइयों में काम शुरू होना बाकी है। हमारी कोशिश है कि अगले एक सप्ताह में हर तहसील के कम से कम एक गांव में मनरेगा का भी काम शुरू हो जाए।

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