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India-China : LAC पर चीन की सारी हेकड़ी होगी दूर, ड्रैगन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भी तैयारी

India-China : LAC पर चीन की सारी हेकड़ी होगी दूर, ड्रैगन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की भी तैयारी

India-China : सीमा पर चीन की धोखेबाजी के बाद से चरम पर चल रहे तनाव के बीच भारत ड्रैगन के साथ बातचीत और सैन्य कार्रवाई दोनों पर ही विचार कर रहा है। सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों का मानना है कि भारत को चीन के खिलाफ जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

पूर्वी लद्दाख में  वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच जारी तनाव को लेकर चर्चा के दौरान सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच ‘टकराव’ और ‘लड़ाई’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि हम चीन के साथ टकराव को बढ़ाना नहीं चाहते हैं, लेकिन हम कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘हम अपने कदम वापस नहीं खींचने जा रहे हैं।’

रिपोर्ट के मुताबिक, जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या सरकार ने सैन्य कार्रवाई के निहितार्थ के बारे में सोचा है? तो उन्होंने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण यह है कि यदि आप परिणामों के बारे में सोचना शुरू करेंगे, तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। वहीं, उनसे इसके पीछे की वजह पूछी गई तो उन्होंने बताया कि 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद तनाव को कम करने को लेकर चीन की ओर से कोई भी कदम उठता हुआ नहीं देखा गया।

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उन्होंने कहा, ‘चीन ने हमारे सैनिकों को शहीद कर दिया। हम उनसे यह उम्मीद नहीं करते कि वे शहादत पर दुख जताएं , लेकिन भारतीय सैनिकों को ही दोषी ठहराना, चीन के इरादे को दिखाता है।’ सूत्र ने कहा कि जैसा चीन बोल रहा है, वह वैसा करता दिखाई तक नहीं दे रहा। वह अभी तक भारत को ही दोषी मानते रहे हैं और निर्माण के लिए भी भारत को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में, जब दिल्ली में यह जानकारी पहुंची थी कि सीमा पर चीन निर्माण कर रहा है, तभी भारतीय सेना को पैट्रोलिंग बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। वहीं, विदेश मंत्रालय भी स्पष्ट मानता है कि वह चीन ही है, जिसने उल्लंघन करते हुए निर्माण शुरू किया था।

‘अब वर्ष 1962 वाला नहीं है भारत’ 

अधिकारी ने बताया कि इन दिनों कोई भी युद्ध नहीं जीतता है और साल 2020 का भारत, 1962 वाला नहीं है। हमारे पास अधिक मजबूत वैश्विक गठबंधन हैं और हमें इसका लाभ उठाने की आवश्यकता होगी। पूरे क्षेत्र में अपने व्यवहार के अनुरूप, चीन डर पैदा करना चाहता है और खुद को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। चीन को यह समझना होगा कि उसे एक करारा जवाब मिलेगा।”

source by : https://www.livehindustan.com/

 

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