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Scholarship Scam : छात्रवृत्ति मामले की जांच में केंद्र सरकार से मदद लेगा कल्याण विभाग

Scholarship Scam : छात्रवृत्ति मामले की जांच में केंद्र सरकार से मदद लेगा कल्याण विभाग

Scholarship Scam :  अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में राज्य सरकार अब केंद्र से भी मदद लेगी। यह निर्णय जिलों में संस्थानों और उसमें नामांकित और लाभान्वित होने वाले अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की सही संख्या निकालने में हो रही परेशानी को देखते हुए लिया गया है। कल्याण विभाग इसी सप्ताह केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय को इसका प्रस्ताव भेजेगा और जांच के लिए लिस्ट उपलब्ध कराने की मांग करेगा।

केंद्र सरकार के पोर्टल पर हर संस्थान का डिटेल निकालने में नई प्रक्रिया से गुजरनी पड़ रही है। इस परेशानी की शिकायत जिलों से मिलने के बाद अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय से इसमें मदद मांगने की तैयारी की है। बता दें कि पिछले साल तक 45 हजार संस्थान अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के लिए जुड़े थे। ऐसे में जिलों को एक-एक कर संस्थानों और उसमें पढ़ने और लाभान्वित होने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या निकालने में समय लग रहा है।

लिहाजा कल्याण विभाग केंद्र सरकार से सभी संस्थानों और उसमें पढ़ने और लाभान्वित होने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या की सूची मांगने जा रहा है। इसके आधार पर ही संबंधित संस्थान का वेरिफिकेशन किया जाएगा और छात्रवृत्ति मामले की तेजी से जांच की जाएगी।

छात्र ही नहीं, स्कूल और हेडमास्टर भी फर्जी

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की एसीबी और जिलास्तर पर अलग-अलग जांच शुरू हो गई है। जिलास्तर पर हो रही जांच में नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पहले जहां फर्जी छात्र-छात्राओं के नाम पर छात्रवृत्ति की राशि उठाने का मामला सामने आया था, वहीं अब फर्जी स्कूल और फर्जी हेडमास्टर के भी छात्रवृत्ति की राशि निकालने की बात सामने आई है। यह मामला गढ़वा का है, जहां दो स्कूलों में फर्जी हेडमास्टर बन अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के करीब 34 लाख रुपए की निकासी कर ली गई। घोटाला करने वाले फर्जी हेड मास्टर की पहचान भी की जा चुकी है।

चाचा-दादा की उम्र के लोगों को भी छात्रवृत्ति दिलाई

धनबाद, लातेहार, गुमला, लोहरदगा, चतरा, गिरिडीह, रांची, खूंटी समेत अन्य जिलों में भी अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले के मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि धनबाद छोड़ किसी भी जिले से कल्याण विभाग में घोटाला संबंधी जांच की रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। चाचा-दादा की उम्र के लोगों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति दिलाने का मामला भी उजागर हुआ है। वहीं, वैसे लोगों को भी छात्रवृत्ति का लाभ दे दिया गया जो संस्थान में कभी नामांकित ही नहीं है। इसके अलावा जो नामांकित हैं, उन्हें फीस के नाम पर छात्रवृत्ति की आधी राशि का भी भुगतान किया गया। कई स्कूल ने तो छात्रवृत्ति के लिए कभी अप्लाई ही नहीं किया, जबकि उनके स्कूल के नाम से नियमित रूप से हर साल छात्रवृत्ति की राशि निकाली जा रही है।

छात्रवृत्ति के लिए स्कूलों का घटा रजिस्ट्रेशन

2019-20 तक प्री मैट्रिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के लिए राज्यभर में करीब 45 लाख शिक्षण संस्थान रजिस्टर्ड थे। राज्य सरकार ने सभी का रजिस्ट्रेशन रद्द कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की। वर्तमान में मात्र 3200 संस्थानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। 2020-21 के सत्र में इन्हीं संस्थानों के छात्र-छात्राओं को अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति मिल सकेगी। इन संस्थानों के फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए कल्याण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिया है। संस्थान द्वारा अप्लाई किए गए छात्र-छात्राओं के नाम का फिजिकल वेरिफिकेशन करने के बाद ही उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाएगा।

source : https://www.livehindustan.com/


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