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कच्ची शराब बनाने के लिए माफिया ने छील दिए देशी कीकर के पेड़

अरावली की पहाड़ियों में बड़े स्तर पर कीकर के पेड़ों को पहुंचाया जा रहा नुकसान पुलिस ने शनिवार को कच्ची शराब बनाने का पकड़ा था सामान, फरार हैं ...

लॉकडाउन के दौरान शराब के ठेके बंद है। ऐसे में शराब माफिया ने अब अरावली के जंगलों में कच्ची शराब बनाने का धंधा शुरू कर दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि शराब माफिया कच्ची शराब तैयार करने के लिए हरे-भरे पेछ़रें को अपना शिकार बना रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कच्ची शराब बनाने में प्रमुख रूप से देसी कीकर की छाल का इस्तेमाल किया जा रहा है। अनंगपुर गांव के जंगलों में 1 हजार से भी ज्यादा बड़े कीकर के पेड़ों को शराब माफिया ने कच्ची दारू बनाने में इस्तेमाल किया है। वहीं, जिन जगहों पर ये लोग छुपकर शराब तैयार करते हैं, वह जगह भी पंजाब भू-संरक्षण अधिनियम 1900 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत आती है। इसको लेकर वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हो रही है। जिला वन अधिकारी ने रविवार को अपने रेंज ऑफिसर को सख्त हिदायत दी है कि वह इस एरिया में गश्त बढ़ाएं।

माफिया के लिए अरावली है महफूज जगह

अरावली की पहाड़ियों के अंदर बने खान काफी गहरे हैं। इन खानों में पानी के स्रोत बने हुए हैं। आजकल दो नंबर का धंधा अरावली के जंगलों में ही हो रहा है। चाहे वह अवैध रूप से बोरवेल लगाकर भूजल स्तर का दोहन करना हो या फिर शराब माफिया द्वारा कच्ची शराब तैयार करना हो। सभी काम आजकल अरावली के जंगलों में होते हैं। यहीं नहीं भू-माफिया अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा कर वहां फार्महाउस भी बना लेते हैं। इन सबके बावजूद फॉरेस्ट डिपार्टमेंट कोई कार्रवाई नहीं करता है। अनंगपुर के जंगलों में शनिवार को पुलिस ने कच्ची शराब बनाने वाले माफिया का सामान बरामद किया है। हालांकि जब पुलिस ने छापा मारा तो शराब तैयार करने वाले लोग वहां से भाग गए। फिर भी पुलिस शराब माफिया तक पहुंचने के लिए तफ्तीश कर रही है।

250 रुपये लीटर बिकती है छाल से बनी शराब

सूत्रों की मानें तो शराब माफिया लॉकडाउन के दौरान काफी मात्रा में कच्ची शराब तैयार कर चुके हैं। अनंगपुर के जिन जंगलों में ये शराब बनती थी, वह पंजाब भू संरक्षण अधिनियम की धारा 4 और 5 के अंतर्गत आती है। यानी कि वहां किसी भी तरह की कोई गतिविधि नहीं हो सकती। बावजूद इसके यह गोरखधंधा चल रहा है। अनुमान है कि शराब माफिया ने कच्ची शराब बनाने के लिए अनंगपुर के जंगलों में कम से कम 1 हजार से भी अधिक देशी कीकर के पेड़ों से छाल निकालकर उन्हें नुकसान पहुंचाया है। दरअसल देशी कीकर के पेड़ अरावली में ज्यादा पाए जाते हैं। ऐसे में इसकी छाल से देशी शराब बनाई जा रही थी। इा शराब को 250 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जाता है।

पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी कार्रवाई

जिला वन अधिकारी राजकुमार ने बताया कि सूचना मिली है कि शराब माफिया कच्ची शराब बनाने के लिए कीकर के पेड़ों की छाल को इस्तेमाल में लाते थे। यह बेहद गलत है। रेंज ऑफिसर को कहा गया है कि वे अरावली में गश्त बढ़ा दें और यह पता करें कि कीकर के कितने पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया है। जो भी कीकर के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता हुआ पकड़ा जाए तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।

source by :  https://navbharattimes.indiatimes.com/

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