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GST बैठक में नहीं मिली कोई राहत, कोरोना के इलाज से जुड़े सामानों को मुक्त किए जाने की मांग

GST बैठक में नहीं मिली कोई राहत, कोरोना के इलाज से जुड़े सामानों को मुक्त किए जाने की मांग

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगभग सात महीने बाद जीएसटी कांउसिल की बैठक बुलाई जिसमें उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के इलाज़ में इस्तेमाल होने वाले सामानों, दवाइयों और वैक्सीन पर फिलहाल जीएसटी लगती रहेगी। और इस मामले पर चर्चा के लिए एक मंत्रिसमूह यानि जीओएम का गठन किया गया, जिसे 8 जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। वहीं मेडिकल उपकरणों को लेकर टैक्स में कटोती की गई है। छोटे और मध्यम कारोबारियों को राहत भी दी गई है। जिसमें रिटर्न फाइलिंग में लेट फीस की रकम घटाने का भी फैसला किया गया है।

कम लेट फीस से रिटर्न फाइल
बता दें कि इस बैठक में पांच राज्यों के वित्त मंत्री ने हिस्सा लिया। वित्त मंत्री ने बताया कि वैसे कारोबारी जिन्होंने रिटर्न नहीं भरा वे अमनेस्टी स्कीम का फायदा उठा सकते है। जिसमें कम लेट फीस से रिटर्न फाइल किया जा सकता है।

मालूम हो कि आज जीएसटी परिषद की बैठक में कोविड से जुड़ी सामग्री मसलन दवाइयों, टीकों और चिकित्सा उपकरणों पर कर की दर को कम करने पर विचार किया गया। इसके अलावा बैठक में राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई के तौर- तरीकों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई वाली परिषद की 43वीं बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई। करीब आठ महीने में यह परिषद की बैठक पहली बैठक थी।

तैयार की गई संयुक्त रणनीति
बैठक से पहले गैर- भाजपा शासित राज्यों मसलन राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल और पश्चिम बंगाल ने कोविड से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों पर शून्य कर की दर के लिए दबाव बनाने की संयुक्त रणनीति तैयार की थी। जीएसटी परिषद में सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कर की दरों पर विचार विमर्श के अलावा परिषद में राज्यों को अनुमानत: 2.69 लाख करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। वर्ष 2017 में जीएसटी व्यवस्था लागू करते समय राज्यों को वैट और अन्य कर लगाने के उनके अधिकार को छोड़ने पर राजी करते हुये उनके राजस्व नुकसान की भरपाई का वादा किया गया था। सूत्रों ने बताया कि जीएसटी दरों पर फिटमेंट समिति ने परिषद को कोविड टीके, दवाओं और अन्य उपकरणों पर कर की दर को शून्य करने के गुण-दोष पर रिपोर्ट सौंप दी है। इस समिति में केंद्र और राज्यों के कर अधिकारी शामिल हैं।

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