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US Navy Operation : भारतीय समुद्री सीमा में बिना मंजूरी अमेरिकी नौसेना ने किया ऑपरेशन, बिगड़ सकते हैं कूटनीतिक रिश्ते

US Navy Operation : भारतीय समुद्री सीमा में बिना मंजूरी अमेरिकी नौसेना ने किया ऑपरेशन, बिगड़ सकते हैं कूटनीतिक रिश्ते

US Navy Operation : अमेरिकी नौसेना की ओर से भारत के एक्सक्लूसिव इकॉनमिक जोन में ऑपरेशन करने की बात सामने आई है। इसके चलते दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद भी पैदा हो सकता है। खुद अमेरिका की 7वीं फ्लीट ने 7 अप्रैल को जारी बयान में इस बात की जानकारी दी है। बयान के मुताबिक, ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन ऑपरेशन के तहत अधिकारों, स्वतंत्रता और कानून की रक्षा होती है, जिनका निर्धारण इंटरनेशनल लॉ में किया गया है।’

खुद अमेरिकी नौसेना के 7वें बेड़े ने कहा कि उसने यह ऑपरेशन भारत की अनुमति के बिना किया है। यह अमेरिकी ऑपरेशन भारत की मैरीटाइम सिक्योरिटी पॉलिसी के खिलाफ है। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक यह ऑपरेशन लक्षद्वीप से 130 नॉटिकल मील दूर पश्चिम में किया गया है। अमेरिकी नौसेना की 7वीं फ्लीट उसका सबसे बड़ा बेड़ा है। इसी की एक टुकड़ी को अमेरिका ने 1971 में बंग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत पर दबाव बनाने के लिए बंगाल की खाड़ी में भेजा था।

पूरे मामले की जानकारी रखने वाले भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि किसी भी तटीय देश की एक्सक्लूसिव इकॉनमिक जोन की सीमा समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील यानी 370 किलोमीटर की दूरी तक होती है। इस एरिया में समुद्र में सभी संसाधनों पर संबंधित देश का अधिकार और संप्रभुता होती है। ऐसे में इस इलाके में किसी मिलिट्री एक्टिविटी के लिए भारत की इजाजत की जरूरत होती है। इसी तरह की हरकत अंडमान निकोबार के करीब चीनी जहाज की ओर से 2019 में की गई थी। तब तत्कालीन नौसेना प्रमुख ने कहा था कि यदि आप कुछ भी हरकत करते हैं तो आपको हमें इसके बारे में बताने और परमिशन लेने की जरूरत है।

अब तक इस मामले में नेवी या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। अमेरिकी नौसेना की 7वीं फ्लीट की ओर से की गई टिप्पणी में कहा गया है, ‘अमेरिकी फोर्सेज इंडो-पैसेफिक रीजन में हर दिन ऑपरेशन करती हैं। ये सभी ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। इनका मकसद यह बताना है कि अमेरिकी सुरक्षा बल कहीं भी उड़, तैर और ऑपरेट कर सकते हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून मंजूरी देता है।’ अमेरिकी नौसेने की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘हम रूटीन और नियमित तौर पर फ्रीडम ऑफ नेविगेशन ऑपरेशन करते हैं। पहले भी हमने ऐसा किया है और आगे भी करते रहेंगे। यह किसी एक देश के बारे में नहीं है।’ अमेरिकी नौसेना इस तरह का ऑपरेशन विवादित दक्षिण चीन सागर में भी करती है।

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